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Breaking : यूनियन बजट 2017 में क्या हुआ सस्ता और महंगा… जानें

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार (1 फरवरी) को संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि उत्पाद एवं सीमा शुल्क पर उनके प्रस्तावों से सरकारी खजाने को कोई खास लाभ या हानि नहीं होगी। सरकार के इस बजट से कुछ चीजें सस्ती हुई हैं तो कुछ महंगी हुई है ।



सस्ते हुए सामान : पवन चक्की, आरओ, पीओएस, पार्सल, चमड़े का सामान, सौर पैनल, प्राकृतिक गैस, बायोगैस, नायलॉन, ऑनलाइन रेल टिकट, सिल्वर फॉयल, सौर ऊर्जा, डिब्बाबंद सब्जियां, नमक, जीवन रक्षक दवाइयां, एलसीडी एवं एलईडी, फिंगर प्रिंट रीडर एवं स्कैनर
महंगे हुए सामान : मोबाइल फोन, पान मसाला, सिगरेट, सिगार, बीड़ी, तंबाकू, एलईडी बल्ब, चांदी का सामान, हार्डवेयर, स्टील का सामान, ड्राय फ्रूट्स, चांदी के गहने, एल्यूमीनियम, मोबाइल फोन विनिर्माण में काम आने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, एलईडी बल्ब विनिर्माण में उपयोग होने वाले कल-पुर्जे, पार्सल के जरिए आयातित सामान, वाटर फिल्टर मेंब्रेन, स्टेनलेस स्टील टेप्स, चमड़े के फुटवियर, विदेशी साइकिल।
जेटली ने बजट पेश करते हुए कहा, “केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के जरिए केंद्र सहकारी संघवाद की भावना से समझौता किए बिना वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के लक्ष्य को हासिल करना जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, “जीएसटी लागू होने से केंद्र और राज्य सरकारों को अधिक कर मिल सकता है क्योंकि इससे कर का दायर बढ़ेगा। मैंने उत्पाद एवं सेवा कर के मौजूदा ढांचे में अधिक बदलाव नहीं करना पसंद किया क्योंकि इनके बदले जल्द ही जीएसटी लागू होने वाला है।
वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में मिडिल क्‍लास को राहत देते हुए इनकम टैक्‍स को घटा दिया है। जेटली ने नौकरी पेशा और छोटे व्यापारी को बड़ी राहत देते हुए तीन लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगने की घोषणा की है। बजट में राजनीतिक सुधारों को ध्यान में रखते हुए लंबे समय से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के नियमों को सख्त करने की मांग उठ रही थीष जिसे मानते हुए सराकर ने राजनैतिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए नियम में कड़े प्रावधान किए गए।

नए नियमों के तहत कोई भी राजनीतिक दल 2000 रुपए से ज्यादा का चंदा कैश में नहीं ले पाएंगे। पार्टियां चेक या डिजीटल माध्यम से चंदा ले सकेंगे। जेटली ने बजट में आम आदमी को निराश नहीं किया है। भारतीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब केंद्र सरकार ने रेलवे के लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं किया है।
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