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NSG के नए प्रपोजल से भारत को मिली मेंबरशिप, पाकिस्तान को दिखाया बाहर का रास्ता

NSG के नए प्रपोजल से भारत को मिली मेंबरशिप, पाकिस्तान को दिखाया बाहर का रास्ता 


न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की मेंबरशिप के लिए एक नया प्रपोजल तैयार हुआ है। इसके मुताबिक एनएसजी में भारत को तो एंट्री मिल सकती है लेकिन पाकिस्तान को नहीं। यह प्रस्ताव एनएसजी के पूर्व प्रेसिडेंट रफाल मारिआनो ग्रॉसी ने मौजूदा प्रेसिडेंट सोंग यंग-वान की रिक्वेस्ट पर तैयार किया है। भारत और पाकिस्तान दोनों ने नॉन-प्रोलिफिरेशन ट्रीटी (परमाणु अप्रसार संधि-एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं इसलिए एनएसजी के सभी सदस्यों की इन्हें प्रवेश देने पर एकराय नहीं है।
एनएसजी में एंट्री नियमों ढील को लेकर अमेरिकी थिंक टैंक ने दी वॉर्निंग…
अमेरिकी थिंक टैंक वाशिंगटन आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (एसीए) ने एनएसजी में एंट्री के लिए नियमों में ढील देने की कोशिशों पर वॉर्निंग दी है। – थिंक टैंक भारत-अमेरिकी सिविल एटमी करार के भी खिलाफ था।
एसीए के डेरिल जी. किम्बाल ने कहा कि नए प्रस्ताव को भारत के पक्ष में तैयार किया गया है क्योंकि इसमें रखी सभी नौ शर्तें भारत पूरी करता है।
क्या है प्रस्ताव में?
एनएसजी मेंबरशिप के लिए अप्लाई करने वाले किसी दूसरे की सदस्यता पर सवाल नहीं उठा सकते। पाकिस्तान भारत की सदस्यता पर सवाल उठाता रहा है जबकि भारत ऐसा नहीं करता।
एनएसजी से पहले से किसी देश को ढील मिली हुई है तो उसे सदस्यता में प्राथमिकता मिल सकती है। भारत को ढील मिली हुई है पाकिस्तान को नहीं।
ये देश NSG में भारत के सपोर्ट में
अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेलारूस, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, सायप्रस, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस और हंगरी।
इटली, जापान, कजाखस्तान, आइसलैंड, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, लात्विया, लिथुआनिया, लग्जमबर्ग, माल्टा, मेक्सिको, नीदरलैंड्स, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, रशियन फेडरेशन, सर्बिया, स्लोवाकिया, स्पेन, स्वीडन, यूक्रेन, यूके, फ्रांस और यूएस।
भारत के लिए मेंबरशिप क्यों है जरूरी?
न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और यूरेनियम बिना किसी खास समझौते के हासिल होगी।
न्यूक्लियर प्लान्ट्स से निकलने वाले कचरे को खत्म करने में भी एनएसजी मेंबर्स से मदद मिलेगी।
साउथ एशिया में हम चीन की बराबरी पर आ जाएंगे।
क्या है NSG?
एनएसजी यानी न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप मई 1974 में भारत के न्यूक्लियर टेस्ट के बाद बना था।
इसमें 48 देश हैं। इनका मकसद न्यूक्लियर वेपन्स और उनके प्रोडक्शन में इस्तेमाल हो सकने वाली टेक्नीक, इक्विपमेंट और मटेरियल के एक्सपोर्ट को रोकना या कम करना है।
– 1994 में जारी एनएसजी गाइडलाइन्स के मुताबिक, कोई भी सिर्फ तभी ऐसे इक्विपमेंट के ट्रांसफर की परमिशन दे सकता है, जब उसे भरोसा हो कि इससे एटमी वेपन्स को बढ़ावा नहीं मिलेगा।
एनएसजी के फैसलों के लिए सभी मेंबर्स का समर्थन जरूरी है। हर साल एक मीटिंग होती है।
भारत ने इस साल अप्रैल में मेंबरशिप के लिए अप्लाई किया था। हालांकि, जून में एनएसजी प्लेनरी की मीटिंग में भारत की एंट्री हो नहीं पाई।

चीन समेत करीब 10 देशों ने भारत का विरोध किया था
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